जय हो भारत के नये खड्ग ,जय तरुण देश के सेनानी !
जय नई आग जय नई ज्योति , जय नये लक्ष्य के अभियानी !
स्वागत है, आओ, काल-सर्प के फन पर चढ़ , चलने वाले,
स्वागत है, आओ, हवनकुण्ड में कूद स्वयं बलने वाले ,
मुट्ठी में लिये भविष्य देश का वाणी में हुंकार लिये ,
मन से उतार कर हाथों में निज स्वप्नों का संसार लिये ,
सेनानी ! करो प्रयाण अभय,भावी इतिहास तुम्हारा है ,
ये नखत अमा के बुझते हैं,सारा आकाश तुम्हारा !!!
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