मंगलवार, 17 दिसंबर 2013

जय हो भारत के नये खड्ग ,जय तरुण देश के सेनानी ! जय नई आग जय नई ज्योति , जय नये लक्ष्य के अभियानी ! स्वागत है, आओ, काल-सर्प के फन पर चढ़ , चलने वाले, स्वागत है, आओ, हवनकुण्ड में कूद स्वयं बलने वाले , मुट्ठी में लिये भविष्य देश का वाणी में हुंकार लिये , मन से उतार कर हाथों में निज स्वप्नों का संसार लिये , सेनानी ! करो प्रयाण अभय,भावी इतिहास तुम्हारा है , ये नखत अमा के बुझते हैं,सारा आकाश तुम्हारा !!!

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